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Author name: Amritesh

श्री जिनसहस्रनाम (लघु) व्रत विधि !! Shri jinsahasranam (laghu) vrat vidhi !!

श्री जिनसहस्रनाम (लघु) व्रत विधि !! Shri jinsahasranam (laghu) vrat vidhi !! श्री जिनसहस्रनाम व्रत विधि(लघु) किसी भी महिने में अष्टमी, चतुर्दशी व पंचमी आदि किसी भी तिथि को यह व्रत किया जा सकता है, व्रत करने की उत्तम विधि उपवास, मध्यम नीरस पेय (कांजी आदि) लेना, जघन्य एकाशन है। व्रत के दिन श्री जिनेन्द्र […]

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सम्यक्त्व पचीसी व्रत विधि !! Samyaktva pachisi vrat vidhi !!

सम्यक्त्व पचीसी व्रत विधि !! Samyaktva pachisi vrat vidhi !! सम्यक्त्व पचीसी व्रत   व्रत की विधि— सम्यग्दर्शन की प्राप्ति और विशुद्धि के लिए यह व्रत किया जाता है। आठ अंगपूर्वक सम्यक्त्व को धारण करके शंकादि ८ दोष, ८ मद, ६ अनायतन और ३ मूढ़ता से दूर रहना ही इसका फल है। यह व्रत नियम

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कनकावली व्रत विधि !! Kanakavali vrat vidhi !!

कनकावली व्रत विधि !! Kanakavali vrat vidhi !! कनकावली व्रत भगवान नेमिनाथ ने तीर्थंकर से तृतीय भवपूर्व ‘सुप्रतिष्ठ’ मुनिराज की अवस्था में इन कनकावली आदि व्रतों का अनुष्ठान किया था। वैसे ही भगवान महावीर के जीव ने ‘नंदन मुनिराज’ के भव में इन्हीं व्रतों का अनुष्ठान किया था। कनकावली व्रत विधि- कनकावली व्रत में ४३४

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सम्पूर्ण जैन आचार्य परंपरा || Sampoorn Jain Aachaary Parampara ||

 प्राचीन जैन आचार्य परंपरा  ३ अनुबद्ध केवली ३ अनुबद्ध केवली ( केवली भगवान गौतम स्वामी – सुधर्मा स्वामी – जम्बू स्वामी )  श्री यति वृषभाचार्य ने भगवान महावीर के निर्वाण के बाद केवली, श्रुत, केवली, ११ अंगधारक, दश अंग के एक देशधारक तथा आचारांग धारक आचार्यों का कथन तिलोयपण्णत्ति खण्ड दो में गाथा १४८८ से

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णमोकार व्रत विधि !! Namokar vrat vidhi !!

णमोकार व्रत विधि !! Namokar vrat vidhi !! नमस्कारपञ्चत्रिंशत्कायां सप्तम्यां सप्त पञ्चम्या: पञ्चचतुर्दश्याश्चतुर्दश नवम्या: नवोपवासा: कथिता:। एतन्नमोकारपञ्चत्रिंशत्कमेतदक्षरसमुदायं विभज्यैकेकाक्षरस्योपवास: करणीय:। अस्मिन् व्रते न मासतिथ्यादिको नियम:, केवलां तिथिं प्रपद्य भवतीति तिथिसावधिकानि व्रतानि। अर्थ- नमस्कारपञ्चत्रिंशत्-नमस्कार पैंतीसी व्रत में सप्तमी के सात उपवास, पंचमी के पाँच उपवास, चतुर्दशी के चौदह उपवास और नवमी के नौ उपवास बताये गये हैं।

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श्री चन्दनषष्ठी व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri chandanshashthi vrat katha evam vrat vidhi !!

श्री चन्दनषष्ठी व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri chandanshashthi vrat katha evam vrat vidhi !! देव नमूँ अरहन्त नित, वीतराग विज्ञान। चन्दनषष्ठी व्रत कथा, कहूँ स्वपर हित जान।। काशी देश में बनारस नाम का प्रसिद्ध नगर है। जिसको तेइसवें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान ने अपने जन्म धारण करने से पवित्र किया था। उसी नगर

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एकावली व्रत विधि !! Ekavali vrat vidhi !!

एकावली व्रत विधि !! Ekavali vrat vidhi !! किंनाम एकावलीव्रतम्? कथं च विधीयते व्रतिकै:? अस्य किं फलम्? उच्यते-एकावल्यामुपवासा एकान्तरेण चतुरशीति: कार्या:, न तु तिथ्यादिनियम:। इदं स्वर्गापवर्गफलप्रदं भवति। इति निरवधिव्रतानि।। अर्थ एकावली व्रत क्या है? व्रती व्यक्तियों के द्वारा यह कैसे किया जाता है? इसका फल क्या है? आचार्य कहते हैं कि एकावली व्रत में एकान्तर

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दशमी व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Dashami vrat katha evam vrat vidhi !!

दशमी व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Dashami vrat katha evam vrat vidhi !! ॐकार हृदयं धरूँ, सरस्वति को शिरनाय । अक्षयदशमी व्रत कथा, भाषा कहूँ बनाय ।।१।। इसी राजगृही नगर में मेघनाद नाम के राजा की रानी पृथ्वीदेवी अत्यन्त रूप और शीलवान थी, परन्तु कोई पूर्व पाप के उदय से पुत्रविहीन होने से सदा

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श्री आकाशपंचमी व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri Aakashpanchami vrat katha evam vrat vidhi !!

श्री आकाशपंचमी व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri Aakashpanchami vrat katha evam vrat vidhi !! आर्यखण्ड के सोरठ देश में तिलकपुर नाम का एक विशाल नगर था। वहाँ महीपाल नाम का राजा और विचक्षणा नामक रानी थी। उसी नगर में भद्रशाल नाम का व्यापारी रहता था उसकी नन्दा नाम की स्त्री से विशाला नाम

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नंदीश्वर पंक्ति व्रत विधि !! Nandishvar pankti vrat vidhi !!

नंदीश्वर पंक्ति व्रत विधि !! Nandishvar pankti vrat vidhi !! इस व्रत में ५६ उपवास और ५२ पारणाएं होती हैं तथा १०८ दिन में पूर्ण होता है। इसमें दधिमुख पर्वत संबंधी एक उपवास १ पारणा के क्रम से ४ उपवास ४ पारणा होने पर अंजनगिरि संबंधी बेला होता है। पुन: पारणा करके ८ रतिकर संबंधी

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