bhavlingisant.com

What is Jainism? Understanding जैन धर्म (जैन धर्म क्या है?)

👉 Read This Article In English. 

Introduction to Jainism | जैन धर्म का परिचय

जैन धर्म (Jainism) भारत का एक प्राचीन spiritual philosophy है, जो आत्मा की शुद्धि, अहिंसा (Non-Violence) और आत्मज्ञान (Self-Realization) पर आधारित है। यह धर्म ईश्वर की कृपा पर नहीं, बल्कि self-effort (पुरुषार्थ) और inner transformation पर विश्वास करता है।

सरल शब्दों में, जैन धर्म जीवन को देखने का एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण है, जो हमें राग-द्वेष से मुक्त होकर peaceful, disciplined और conscious life जीना सिखाता है।


जैन धर्म क्या है? | What is Jainism?

जैन धर्म का अर्थ है – जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म

‘जिन’ शब्द का अर्थ (Meaning of Jin)

‘जिन’ शब्द संस्कृत की ‘जि’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है – जीतना (to conquer)

जिन वे महापुरुष होते हैं जिन्होंने:

  • अपनी इन्द्रियों (senses) को जीता हो
  • राग और द्वेष (attachment & hatred) से मुक्ति पाई हो
  • कर्मों के बंधन से मुक्त होकर Keval Gyan (Omniscience) प्राप्त किया हो

“जयति इति जिन:” – जो स्वयं पर विजय प्राप्त करे, वही जिन है।

जो जिनेन्द्र भगवान के उपासक होते हैं, उन्हें जैन (Jain) कहा जाता है।


जैन धर्म का लक्ष्य | Ultimate Goal of Jainism

जैन धर्म का अंतिम लक्ष्य है – मोक्ष (Liberation / Nirvana)

मोक्ष की प्राप्ति के लिए जैन दर्शन चार मूल आधारों पर चलता है:

  • Conduct में अहिंसा (Ahimsa)
  • Thinking में अनेकान्तवाद (Anekantavada)
  • Speech में स्याद्वाद (Syadvada)
  • Lifestyle में अपरिग्रह (Non-possessiveness)

इनके अभ्यास से आत्मा वीतराग अवस्था प्राप्त कर परमात्म स्वरूप को प्राप्त करती है।


जैन धर्म के प्राचीन नाम | Ancient Names of Jainism

जैन धर्म को विभिन्न कालों में अलग-अलग नामों से जाना गया है:

1. जिनधर्म

जिनेन्द्र भगवान द्वारा प्रतिपादित धर्म।

2. आर्हत धर्म (Arhat Dharma)

अरिहंत भगवान द्वारा उपदेशित धर्म।

3. सनातन धर्म (Sanatan Dharma)

जो अनादि काल से चला आ रहा हो।

4. निर्ग्रन्थ धर्म (Nirgrantha Dharma)

परिग्रह (attachments) से पूर्णतः मुक्त साधुओं का धर्म।

5. श्रमण धर्म (Shraman Dharma)

आत्मशुद्धि हेतु निरंतर श्रम और तप करने वालों का मार्ग।


धर्म का वास्तविक अर्थ | What is Religion According to Jainism?

आज अलग-अलग मत अपने-अपने ग्रंथों को धर्म कहते हैं, लेकिन जैन दर्शन में:

धर्म = स्वभाव (Nature)

हर वस्तु का एक निश्चित, सहज (natural) और त्रैकालिक (eternal) स्वभाव होता है।


त्रैकालिक और सहज का अर्थ | Trikalik & Sahaj Explained

त्रैकालिक (Trikalik)

जो भूत, वर्तमान और भविष्य – तीनों कालों में समान रहता है।

सहज (Sahaj)

जो बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के स्वयं में विद्यमान हो।

उदाहरण:
अग्नि का स्वभाव ऊष्णता (heat) है। यह स्वभाव किसी ने दिया नहीं, बल्कि अग्नि के अस्तित्व के साथ ही है।


आत्मा का स्वभाव | Nature of Soul in Jain Philosophy

जैन धर्म के अनुसार आत्मा का मूल स्वभाव है:

  • ज्ञान (Knowledge)
  • दर्शन (Perception)

इसके साथ आत्मा के अन्य natural virtues हैं:

  • क्षमा (Forgiveness)
  • मार्दव (Humility)
  • आर्जव (Straightforwardness)
  • शौच (Contentment)

क्रोध, लोभ, अहंकार और माया आत्मा के स्वभाव नहीं बल्कि vibhav (external distortions) हैं।


जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांत | Core Principles of Jainism

अनेकान्तवाद (Anekantavada)

सत्य के अनेक पहलू होते हैं। किसी भी वस्तु को एक ही दृष्टि से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।

स्याद्वाद (Syadvada)

किसी कथन को particular point of view से कहना।

कर्म सिद्धांत (Law of Karma)

आत्मा अपने कर्मों से बंधती है और कर्मों के क्षय से मुक्त होती है।

आत्मा का अस्तित्व (Existence of Soul)

हर जीव में आत्मा है और सभी आत्माएँ समान मूल्य की हैं।


जैन धर्म के नियम एवं तथ्य | Important Rules & Facts of Jainism

(यह भाग SEO और reader-engagement दोनों को ध्यान में रखकर विस्तार से लिखा गया है)

अहिंसा – Supreme Principle of Jainism

“Ahimsa Parmo Dharma”

जैन धर्म में किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से नुकसान पहुँचाना पाप माना गया है।

शाकाहार और आहार नियम (Jain Diet Rules)

  • पूर्ण शाकाहार
  • जमीकंद (potato, onion, ginger) का त्याग
  • सूर्यास्त के बाद भोजन निषेध

अपरिग्रह (Non-Possessiveness)

कम से कम संसाधनों में संतोषपूर्वक जीवन जीना।

व्रत और उपवास (Fasting & Vows)

जैन धर्म में उपवास आत्मशुद्धि का प्रभावी माध्यम है। कई व्रत 8 दिन से लेकर 30+ दिनों तक होते हैं।


तीर्थंकर और जैन परंपरा | Tirthankaras in Jainism

जैन धर्म में 24 तीर्थंकर माने गए हैं:

  • प्रथम: भगवान ऋषभदेव (Adinath)
  • अंतिम: भगवान महावीर (Mahavira)

जैन धर्म में कोई creator-god नहीं, बल्कि spiritual teachers (Tirthankaras) होते हैं।


जैन साधुओं का जीवन | Life of Jain Monks

दिगंबर साधु (Digambara Monks)

  • वस्त्र त्याग
  • दिन में एक बार आहार
  • पैदल विहार
  • कठोर संयम और तपस्या

श्वेतांबर साधु (Shwetambara Monks)

  • सफेद वस्त्र

जैन धर्म की प्राचीनता और आधुनिक relevance

सिंधु घाटी सभ्यता के समय भी जैन धर्म की मान्यता स्वीकार थी। आज के समय में non-violence, sustainability और minimalism जैसे concepts जैन दर्शन को और अधिक relevant बनाते हैं।

जैन दर्शन को और गहराई से समझें (Related Jainism Articles)

यदि आप जैन धर्म के सिद्धांतों के साथ-साथ उसके इतिहास, ब्रह्मांडीय दृष्टि और साधना को समझना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लेख सहायक होंगे: 👉


Conclusion | निष्कर्ष

जैन धर्म केवल एक religion नहीं बल्कि way of life है। यह हमें सिखाता है कि बाहरी दुनिया बदलने से पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है। अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम के माध्यम से जैन दर्शन आज भी मानवता के लिए एक timeless guide है।

Scroll to Top