bhavlingisant.com

Author name: Amritesh

सम्मेदशिखर व्रत विधि !! Sammeda shikhar vrat vidhi !!

सम्मेदशिखर व्रत विधि !! Sammeda shikhar vrat vidhi !! सम्मेदशिखर व्रत विधि सम्मेदशिखर सिद्धक्षेत्र शाश्वत तीर्थ है। यहाँ से हमेशा चतुर्थकाल में तीर्थंकर भगवान एवं असंख्यातों मुनिगण मोक्ष प्राप्त करते रहे हैं और आगे भी मोक्ष प्राप्त करते रहेंगे। इस सिद्धक्षेत्र के २५ व्रत हैं। इस बार चतुर्थकाल में हुण्डावसर्पिणी के निमित्त से सम्मेदशिखर पर्वत […]

सम्मेदशिखर व्रत विधि !! Sammeda shikhar vrat vidhi !! Read More »

श्री त्रिलोक तीज व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri triloka tij vrat katha evam vrat vidhi !!

श्री त्रिलोक तीज व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri triloka tij vrat katha evam vrat vidhi !! श्री त्रिलोक तीज व्रत वन्दों श्री जिनदेव पद, वन्दूं गुरु चरणार। वन्दूँ माता सरस्वती, कथा कहूँ हितकार।। जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र संबंधी कुरुजांगल देश में हस्तिनापुर नामक एक अति रमणीक नगर है। वहाँ का राजा कामदुक और रानी

श्री त्रिलोक तीज व्रत कथा एवं व्रत विधि !! Shri triloka tij vrat katha evam vrat vidhi !! Read More »

श्रवण द्वादशी व्रत विधि !! Shravan dvadashi vrat vidhi !!

श्रवण द्वादशी व्रत विधि !! Shravan dvadashi vrat vidhi !! श्रवण द्वादशी व्रत श्रवणद्वादशीव्रतस्तु भाद्रपदशुक्लद्वादश्यां तिथौ क्रियते। अस्य व्रतस्यावधि: द्वादशवर्षपर्यन्तमस्ति। उद्यापनान्तरं व्रतसमाप्तिर्भवति। अर्थ- श्रवणद्वादशी व्रत भाद्रपद शुक्ला द्वादशी को किया जाता है। यह व्रत बारह वर्ष तक करना पड़ता है। उद्यापन करने के उपरान्त व्रत की समाप्ति की जाती है। विवेचन- श्रवण द्वादशी व्रत के दिन

श्रवण द्वादशी व्रत विधि !! Shravan dvadashi vrat vidhi !! Read More »

ज्येष्ठ जिनवर व्रत विधि !! Jyeshtha jinavar vrat vidhi !!

ज्येष्ठ जिनवर व्रत विधि !! Jyeshtha jinavar vrat vidhi !! ज्येष्ठ जिनवर व्रत ज्येष्ठकृष्ण पक्षे प्रतिपदि ज्येष्ठशुक्ले प्रतिपदि चोपवास:, आषाढ़कृष्णस्य प्रतिपति चोपवास:, एवमुपवासत्रयं करणीयम्, ज्येष्ठमासस्यावशेषदिवसेष्वेकाशनं करणीयम्, एतद्व्रतं ज्येष्ठजिनवरव्रतं भवति। ज्येष्ठप्रति-पदामारभ्याषाढकृष्णाप्रतिपत् पर्यन्तं भवति। अर्थ- ज्येष्ठ कृष्णा प्रतिपदा, ज्येष्ठशुक्ला प्रतिपदा और आषाढ़ शुक्ला प्रतिपदा, इन तीनों तिथियों में तीन उपवास करने चाहिए। ज्येष्ठ मास के शेष दिनों

ज्येष्ठ जिनवर व्रत विधि !! Jyeshtha jinavar vrat vidhi !! Read More »

मुक्तावली व्रत विधि !! Muktavali vrat vidhi !!

मुक्तावली व्रत विधि !! Muktavali vrat vidhi !!   मुक्तावली व्रत मुक्तावली व्रत दो प्रकार का होता है-लघु और बृहत्। लघु व्रत में नौ वर्ष तक प्रतिवर्ष ९-९ उपवास करने होते हैं। पहला उपवास भाद्रपद शुक्ला सप्तमी को, दूसरा आश्विन कृष्णा षष्ठी को, तीसरा आश्विन कृष्णा त्रयोदशी को, चौथा आश्विन शुक्ला एकादशी को, पाँचवाँ कार्तिक

मुक्तावली व्रत विधि !! Muktavali vrat vidhi !! Read More »

अक्षय निधि व्रत विधि !! Akshaya nidhi vrat vidhi !!

अक्षय निधि व्रत विधि !! Akshaya nidhi vrat vidhi !! अक्षय निधि व्रत अक्षयनिधिनियमस्तु श्रावणशुक्ला दशमी भाद्रपदशुक्ला तत्कृष्णा चेति दशमीत्रयं पञ्चवर्षे यावत् व्रतं कार्यम्; दशमीहानौ तु नवम्यां वृद्धौ तु यस्मिन् दिने पूर्णा दशमी तस्मिन्नेव दिने व्रतं कार्यम्; वृद्धिगततिथौ सोदयप्रमाणेऽपि व्रतं न कार्यम्। अर्थ- अक्षय निधि व्रत श्रावण शुक्ला दशमी, भाद्रपद कृष्णा दशमी, भाद्रपद शुक्ला दशमी,

अक्षय निधि व्रत विधि !! Akshaya nidhi vrat vidhi !! Read More »

कवलचान्द्रायण व्रत विधि !! Kaval chandrayan vrat vidhi !!

कवलचान्द्रायण व्रत विधि !! Kaval chandrayan vrat vidhi !! योऽमावास्योपवासी प्रतिपदि कवलाहारमात्र: पुरस्तात्। तद्वृद्ध्या पौर्णमासीमुपवनयुतो न्हासयन्ग्रासमग्रे।। सामावास्योपवास: स भजति तपसश्चंद्रगत्यानुपूर्व्या। चार्व्या चांद्रायणस्य प्रविततयशस: कर्तृण: कर्तृभावं।।८।। (जिनसेनाचार्य विरचित हरिवंश पु. सर्ग ३४) अर्थ— इस कवल चांद्रायण व्रत की विधि को जिनसेन स्वामी ने हरिवंश पुराण में इस प्रकार बताई है कि—अमावस्या को उपवास करके शुक्लपक्ष की

कवलचान्द्रायण व्रत विधि !! Kaval chandrayan vrat vidhi !! Read More »

वीरशासन जयंती व्रत विधि !! Veershasan jayanti vrat vidhi !!

वीरशासन जयंती व्रत विधि !! Veershasan jayanti vrat vidhi !! वीरशासन जयंती व्रत (श्री गौतम स्वामी व्रत विधि) आज से पच्चीस सौ छ्यासठ१ वर्ष पूर्व राजगृही के विपुलाचल पर्वत पर श्रावण कृष्णा प्रतिपदा के दिन भगवान महावीर स्वामी की प्रथम दिव्यध्वनि खिरी थी अत: यही पवित्र दिन ‘‘वीर शासन जयंती’’ पर्व के नाम से प्रसिद्धि

वीरशासन जयंती व्रत विधि !! Veershasan jayanti vrat vidhi !! Read More »

चारित्रलब्धि ( वृहत् ) व्रत विधि !! Charitralabdhi (vrahat) vrat vidhi !!

चारित्रलब्धि ( वृहत् ) व्रत विधि !! Charitralabdhi (vrahat) vrat vidhi !! अनादिनिधन मूलमंत्र णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं।। चारित्रलब्धिव्रत अहिंसा महाव्रत के १४ भेद (१) बादरैकेन्द्रियपर्याप्त १. ॐ ह्रीं मन:कृतबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। २. ॐ ह्रीं मन:कारितबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। ३. ॐ ह्रीं मनोऽनुमोदितबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। ४. ॐ ह्रीं वचनकृतबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। ५. ॐ ह्रीं वचनकारितबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। ६. ॐ ह्रीं वचनानुमोदितबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। ७. ॐ ह्रीं कायकृतबादरैकेन्द्रियपर्याप्तिंहसाविरतिमहाव्रताय नम:। ८. ॐ

चारित्रलब्धि ( वृहत् ) व्रत विधि !! Charitralabdhi (vrahat) vrat vidhi !! Read More »

षट्खण्डागम व्रत विधि !! Shatkhandagam vrat vidhi !!

षट्खण्डागम व्रत विधि !! Shatkhandagam vrat vidhi !! षट्खण्डागम व्रत विधि युग की आदि में भगवान ऋषभदेव ने अयोध्या में जन्म लिया। प्रजा को असि, मषि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प ऐसी षट् क्रियाओं का उपदेश देकर जीवनजीने की कला सिखाई, अनन्तर किसी समय वैराग्य को प्राप्त होकर इन्द्रों द्वारा लायी गई पालकी में बैठकर

षट्खण्डागम व्रत विधि !! Shatkhandagam vrat vidhi !! Read More »

Scroll to Top