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Author name: Amritesh

तेरहद्वीप व्रत(लघु) विधि !! Terahadveep vrat (laghu ) vidhi !!

तेरहद्वीप व्रत(लघु) विधि !! Terahadveep vrat (laghu ) vidhi !! तेरहद्वीप व्रत(लघु) तेरहद्वीपसंबंधी अकृत्रिम जिनमंदिरों के अतीव संक्षेप में तेरह व्रत करना है। किसी भी माह में, किसी भी तिथि को इन व्रतों को कर सकते हैं। व्रत के दिन तेरहद्वीप जिनालय पूजा करके प्रत्येक व्रत में एक-एक मंत्र का जाप्य करना है। व्रत की […]

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तीन चौबीसी व्रत विधि !! Teen chobisi vrat vidhi !!

तीन चौबीसी व्रत विधि !! Teen chobisi vrat vidhi !! तीन चौबीसी व्रत विधि व्रत विधि— जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र के वर्तमानकालीन तीर्थंकर श्री ऋषभदेव से लेकर श्री महावीरपर्यंत २४ हैंं। ऐसे ही भूतकालीन श्री निर्वाणनाथ से लेकर श्री शांतिनाथ पर्यंत २४ हैं, पुन: भविष्यत्कालीन श्रीमहापद्म से लेकर अनंतवीर्य पर्यंत चौबीस हैं। ये २४±२४±२४·७२ तीर्थंकर के

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श्रुतज्ञान व्रत विधि !! Srutagyan vrat vidhi !!

श्रुतज्ञान व्रत विधि !! Srutagyan vrat vidhi !! श्रुतज्ञान व्रत (१) पहली विधि- श्रुतविधि उपवास में मतिज्ञान के २८, ग्यारह अंगों के ११, परिकर्म के २, सूत्र के ८८, प्रथमानुयोग का १, चौदह पूर्वों के १४, पाँच चूलिका के ५, अवधिज्ञान के ६, मन: पर्ययज्ञान के २ और केवलज्ञान का १, ऐसे १५८ उपवास करने होते

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मेरु पंक्ति व्रत विधि !! Meru pankti vrat vidhi !!

मेरु पंक्ति व्रत विधि !! Meru pankti vrat vidhi !! मेरु पंक्ति व्रत विधि पाँच मेरु संबंधी ८० चैत्यालयों के व्रत मेरू पंक्ति व्रत मे किये जाते हैं, इस व्रत का प्रारंभ श्रावण मास से माना जाता है। युग या वर्ष का प्रारंभ प्राचीन भारत में इसी दिन से होता है। श्रावण कृष्णा प्रतिपदा से

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तपोञ्जलि व्रत विधि !! Taponjali vrat vidhi !!

तपोञ्जलि व्रत विधि !! Taponjali vrat vidhi !! तपोञ्जलि व्रत कींनाम तपोऽञ्जलिर्व्रतम्? द्वादशमासेषु निशिजलपानं न कत्र्तव्यमुपवासाश्चतुर्विंशतय: कार्या:, अष्टम्यां चतुर्दश्यां नैव नियम: अष्टम्यामेव चतुद्र्दश्यामेवेति। अर्थ- तपोऽञ्जलि व्रत की क्या विधि है? कैसे किया जाता है? आचार्य कहते हैं कि बारह महीनों तक अर्थात् एक वर्ष पर्यन्त रात को पानी नहीं पीना और एक वर्ष में चौबीस

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कर्मनिर्जरा कथा एवं व्रत विधि !! Karmanirjara katha evam vrat vidhi !!

कर्मनिर्जरा कथा एवं व्रत विधि !! Karmanirjara katha evam vrat vidhi !! कर्मनिर्जरा व्रत विधि एवं कथा व्रतविधि— आश्विन सुदी ५ के दिन इन व्रतिकों को प्रासुक जल से अभ्यंगस्नान करके नया धौतवस्त्र पहनना चाहिए। सब पूजा-सामग्री हाथ में लेकर चैत्यालय में जाकर मंदिर की तीन प्रदक्षिणा करके ईर्यापथशुद्धि आदि क्रिया करके श्री जिनेन्द्र को

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मनोकामना सिद्धि महावीर व्रत विधि !! Manokamana siddhi mahaveer vrat vidhi !!

मनोकामना सिद्धि महावीर व्रत विधि !! Manokamana siddhi mahaveer vrat vidhi !! मनोकामना सिद्धि महावीर व्रत एवं मंत्र व्रत विधि— जैनशासन में पर्वों की भांति ही अनादिकाल से व्रतों की परम्परा भी चली आ रही है जिनमें दो प्रकार के व्रत प्रचलित हैं-१. सोलहकारण, दशलक्षण, पंचमेरु, आष्टान्हिका, रत्नत्रय आदि पर्वों में किये जाने वाले व्रत

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चौंसठ ऋद्धि व्रत विधि !! Chonsatha riddhi vrat vidhi !!

चौंसठ ऋद्धि व्रत विधि !! Chonsatha riddhi vrat vidhi !! चौंसठ ऋद्धि व्रत विधि चोसठ ऋद्धि मंत्र की अपेक्षा चौंसठ व्रत करना चाहिए। व्रत के दिन उपवास करना उत्तम, अल्पाहार फल, दूध, मेवा या जल आदि लेना मध्यम और एक बार शुद्ध भोजन करना जघन्य विधि है। प्रत्येक माह में अष्टमी, चतुर्दशी आदि किसी भी

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सिंह निष्क्रीडित व्रत विधि !! Sinha nishkridit vrat vidhi !!

सिंह निष्क्रीडित व्रत विधि !! Sinha nishkridit vrat vidhi !! सिंह निष्क्रीडित व्रत सिंह निष्क्रीड़ित विधि-सिंह निष्क्रीडित व्रत जघन्य, मध्यम और उत्कृष्ट के भेद से तीन प्रकार है। इनमें से प्रथम ही जघन्य व्रत की विधि को बतलाते है- जघन्य सिंह निष्क्रीडित व्रत विधि-इसमें पहले एक उपवास एक पारणा और दो उपवास एक पारणा करना

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वृहत्पल्य व्रत विधि !! Vrhatpalya vrat vidhi !!

वृहत्पल्य व्रत विधि !! Vrhatpalya vrat vidhi !! वृहत्पल्य व्रत विधि जिस किसी ने मनुष्य जन्म प्राप्त करके यदि पल्य विधान नाम का व्रत किया है, वह भव्य है, यह बात निश्चित है। यह व्रत श्रवण मात्र से ही असंख्यात भवों के पापों का नाश कर देता है और तत्काल ही स्वर्गमोक्ष को भी देने

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