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Author name: Amritesh

समवसरण व्रत विधि (लघु) !! Samavasaran vrat vidhi (Laghu)

समवसरण व्रत विधि (लघु) !! Samavasaran vrat vidhi (Laghu) समवसरण व्रत(लघु) विधि- समवसरण का व्रत समवसरण की आठ भूमि, तीन कटनी आदि को लक्षित करके किया जाता है। इसमें २४ व्रत हैं। व्रत के दिन तीर्थंकर प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक, समवसरण पूजा करके उपवास करें। उत्तम विधि उपवास, मध्यम अल्पाहार एवं जघन्य एकाशन है। व्रत […]

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रोहिणी व्रत कथा एवं विधि !! Rohini vrat katha evam vidhi !!

रोहिणी व्रत कथा एवं विधि !! Rohini vrat katha evam vidhi !! रोहिणी व्रत विधि एवं कथा जम्बूद्वीप के इसी भरत क्षेत्र में कुरुजांगल देश है, इसमें हस्तिनापुर नाम का सुन्दर नगर है। किसी समय यहाँ वीतशोक राजा राज्य करते थे। इनकी रानी का नाम विद्युत्प्रभा था। इन दोनों के एक अशोक नाम का पुत्र

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तीर्थंकर जन्मभूमि व्रत विधि !! Tirthankar janmbhumi vrat vidhi !!

तीर्थंकर जन्मभूमि व्रत विधि !! Tirthankar janmbhumi vrat vidhi !! तीर्थंकर जन्मभूमि व्रत वर्तमानकालीन २४ तीर्थंकरों की १६ जन्मभूमियों की वंदना के उद्देश्य से १६ व्रत करना है। व्रत के दिन उन-उन तीर्थंकरों की पूजन करें तथा ‘‘तीर्थंकर जन्मभूमि विधान’’ की पुस्तक से उन-उन जन्मभूमियों की भी पूजन करें। व्रत के उद्यापन में संभव हो

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शांतिनाथ व्रत/शांति भक्ति व्रत विधि !! Shantinath vrat/ shanti bhakti vrat vidhi

शांतिनाथ व्रत/शांति भक्ति व्रत विधि !! Shantinath vrat/ shanti bhakti vrat vidhi शांतिनाथ व्रत(शांति भक्ति व्रत) परिचय- श्री शांतिनाथ भगवान सोलहवें तीर्थंकर हैं, साथ ही पाँचवें चक्रवर्ती एवं बारहवें कामदेव भी हुए हैं। इस प्रकार ये भगवान तीन पद के धारक महान हुए हैं। श्री पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित शांतिभक्ति साधुगण एवं श्रावकगण सभी में

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चौबीस तीर्थंकर व्रत विधि !! Choubis tirthankar vrat vidhi !!

चौबीस तीर्थंकर व्रत विधि !! Choubis tirthankar vrat vidhi !! चौबीस तीर्थंकर व्रत व्रत के दिन २४ तीर्थंकर प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक एवं पूजन करें। व्रत की उत्तम विधि उपवास, मध्यम विधि अल्पाहार एवं जघन्य विधि एकाशन है। इसमें २४ व्रत करना है। व्रत के दिन प्रत्येक तीर्थंकर की एक-एक जाप्य एवं एक समुच्चय जाप्य

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त्रिलोकसार व्रत विधि !! Triloksar vrat vidhi !!

त्रिलोकसार व्रत विधि !! Triloksar vrat vidhi !! त्रिलोकसार व्रत त्रिलोकसार विधि- जिसमें नीचे से पाँच से लेकर एक तक, फिर दो से लेकर चार तक और उसके बाद तीन से लेकर एक तक बिन्दु रखी जावें यह त्रिलोकसार विधि है। इसका प्रस्तार तीन लोक के आकार का बनाना चाहिए। इसमें तीस धारणाएँ अर्थात् तीस

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जिनमुखावलोकन व्रत विधि !! Jinamukhovalokan vrat vidhi !!

जिनमुखावलोकन व्रत विधि !! Jinamukhovalokan vrat vidhi !! जिनमुखावलोकन व्रत विधि किंनाम जिनमुखावलोकनं व्रतम्? को विधि:? जिनमुखदर्शनानन्तरमाहारो यस्मिन् तज्जिनमुखावलोकनं नामैतत् निरवधि व्रतम्। इदं व्रतं भाद्रपदमासे करणीयम्, प्रोषधोपवासानन्तरं पारणा पुन: प्रोषधोपवास:, एवमेव प्रकारेण मासान्तपर्यन्तमिति। अर्थ- जिनमुखावलोकन व्रत किसे कहते हैं? इसकी विधि क्या है? आचार्य उत्तर देते हैं कि प्रात:काल जिनेन्द्रमुख देखने के अनन्तर आहार ग्रहण

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नवग्रहशांति व्रत विधि !! Navagraha shanti vrat vidhi !!

नवग्रहशांति व्रत विधि !! Navagraha shanti vrat vidhi !! नवग्रहशांति व्रत विधि— वर्ष में तीन बार आष्टान्हिक पर्व आता है। उन्हीं पर्वों में एक दिन पहले से यह व्रत किया जाता है जैसे कि आषाढ़ शुक्ला सप्तमी से आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा तक। कार्तिक शु. सप्तमी से पूर्णिमा तक एवं फाल्गुन शु.७ से पूर्णिमा तक ऐसे

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रविव्रत विधि एवं कथा !! Ravivrat vidhi evam katha !!

रविव्रत विधि एवं कथा !! Ravivrat vidhi evam katha !! रविव्रत विधि एवं कथा आदित्यव्रते पार्श्वनाथार्कसंज्ञके आषाढमासे शुक्लपक्षे तत्प्रथमादित्यमारभ्य नवसु अर्कदिनेषु व्रतं कार्यं नववर्षं यावत्। प्रथमवर्षे नवोपवास:, द्वितीयवर्षे नवैकाशना:, तृतीयवर्षे नवकाञ्जिका:, चतुर्थवर्षे नवरूक्षा:, पञ्चमवर्षे नवनीरसा:, षष्ठवर्षे नवालवणा:, सप्तमवर्षे नवागोरसा:, अष्टमवर्षे नवोनोदरा:, नवमवर्षे अलवणा ऊनोदरा: नव। एवमेकाशीति: कार्या:। व्रतदिने श्रीपार्श्वनाथस्याभिषेकं कार्ये पूजनं च। समाप्तावुद्यापनं च कार्यम्,

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गणधरवलय व्रत विधि !! Ganadhar valay vrat vidhi !!

गणधरवलय व्रत विधि !! Ganadhar valay vrat vidhi !!     गणधरवलय व्रत विधि व्रत विधि— गणधरवलय मंत्र श्री गौतमस्वामी के मुखकमल से निकले हुए अत्यधिक महिमाशाली मंत्र हैं, ये संपूर्ण ऋद्धि- सिद्धि को देने वाले और सर्व रोगों को तथा सर्व संकटों को हरने वाले हैं। ये ४८ मंत्र हैं। इनके ४८ व्रत होते

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