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Jinalaya

देखो! जिनागम में नवदेवताओं का कथन आया हुआ है | जिनमें क्रम से अरिहंत , सिद्ध , आचार्य , उपाध्याय , साधु , जिनधर्म , जिनागम , जिनचैत्य , जिनचैत्यालय – ये नवदेवता कहें गये हैं | ये सभी हमारे लिये परमपूज्य हैं , परमवंदनीय हैं और हमारे कर्मों के नाश में कारण हैं | और जो हमारे कर्म नाश में कारण हैं यदि विवेक न रखा जाये तो ये ही हमारे कर्म बंध में भी कारण बन जाते हैं | हम रास्ते पर चलते हैं कुछ भी अशुद्ध वस्तु मान लो हमारे पैरों में लग गयी और हम ऐसे ही पैरों से जिनालय में प्रवेश कर गये तो हमारे प्रमाद से कितना बढ़ा दोष हमारी चर्या में लग जायेगा | इसलिए हम बिना पैर धोये कभी जिनालय आदि में प्रवेश नहीं करते हैं | आप लोग श्रावक हो, आपको भी कभी भी बिना पैर धोये जिनालय आदि पवित्र स्थानों में प्रवेश नहीं करना चाहिए, इसका क्या फल होता है इसके लिये एक बार ‘ करकंडू ‘ की कहानी जिनागम में आयी हुयी है उसे अवश्य सभी को पढ़ना चाहिये |
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