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नाम परमात्मा का


परमात्मा का नाम श्रद्धा भक्ति से स्मरण किया जाये, तो पाप कर्मों का समापन सहज ही हो जाता है। परमात्मा के नाम में वह शक्ति विद्यमान है जो हमारी आत्मा को पवित्र बना सकती है। परमात्मा की स्तुति आराधना तो पाप कर्मों की नाशक है ही। परमात्म नाम से भी पापकर्म भयभीत होकर पलायन कर जाते हैं। संसारी जीव अनादि से पापकर्मों का ही उपार्जन करने में लगे हैं। इसी कारण संसार के दुःखों से मुक्ति नहीं मिल रही। अगर वास्तव में दुःख मुक्ति चाहते हो तो पापकर्म का अन्त करना होगा। पापकर्म एकमात्र परमात्म भक्ति और प्रभु के पवित्र नाम के स्मरण से ही नाश को प्राप्त होते हैं अतः जीते जी इस जीवन में सभी को परमात्मा की भक्ति आराधना के लिये तत्पर होना चाहिये जिससे इस लोक तथा परलोक में सुख की प्राप्ति तथा परम्परा से मोक्ष की उपलब्धि हो।

हनुमान ने राम नाम की श्रद्धा से ही पानी में पत्थर तैरा दिये। जबकि राम के हाथ से छूटने वाले पत्थर पानी में डूब गये। अंजनचोर ने णमोकार मंत्र की आराधना से विद्या सिद्ध कर ली। णमोकार मंत्र में पंचरमेष्ठी के गुणों का स्तवन नहीं अपितु पंचपरमेष्ठी को नमस्कार किया गया है। अंजनचोर ने सच्चीश्रद्धा से नाम जाप किया, और संसार सागर से पार होकर निर्वाण को प्राप्त कर लिया। जब परमात्म नाम से अंजनचोर पार हो सकता है। हनुमान के पत्थर तैर सकते हैं, तो हमारी आत्मा जो पापकर्मों से भारी होकर संसार में डूब रही है वह क्यों नहीं तैरेगी अर्थात् अवश्य ही तैरेगी। हमें मंदिर, दुकान, मकान राह में सदैव परमात्म नाम और णमोकार मंत्र जपते रहना चाहिये। जिससे आत्मा पवित्रता को प्राप्तकर परमात्मा बन सके।


Youtube/ Jinagam Panth Jain Channel

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