धर्म अमृत का असर

धर्म अमृत का असर

धर्म अमृत का असर

Posted On: 05-August-2022

जो जिसकी संगति करता है उसके ऊपर उसका असर अवश्य दिखाई देता है। पूज्य गुरुदेव के श्री संघ का मंगल विहार छतरपुर से विश्व विख्यात पर्यटन नगरी अतिशय क्षेत्र खजुराहो की ओर चल रहा था। पूज्य गुरुदेव अपने संघस्थ साधुओं को द्रव्य संग्रह के क्लास पढ़ाते हुए चल रहे थे, सभी साधक गुरुमुख से द्रव्य संग्रह की गाथाओं में भरा हुआ रहस्य सुन-सुन हर्षित हो रहे थे ।
       तभी सामने से तेज गति में आती हुई एक कार गुरुदेव से लगभग 20- 25 फिट दूर आकर अचानक बीच रोड पर ही खड़ी हो गई और उसमें से एक युवक निकलकर लड़खड़ाते कदमों से गुरुदेव की ओर बढ़ा और सीधा चरणों में साष्टांग हो गया सभी लोग समझ चुके थे कि वह युवक शराब के नशे में है उसको गुरुदेव ने आशीर्वाद दिया और आगे बड़े, तभी उस युवक ने पीछे चल रहे अन्य साधु (मुनिराज)के चरण पकड़ लिए और मुनिराज एकदम आगे को बड़े सो भूमि पर गिर पड़े गुरुदेव ने तुरंत पीछे मुड़कर उनको उठाया और सम्हाला।उस युवक को आत्मग्लानि हुई बार-बार क्षमा याचना करने लगा गुरुदेव ने मुस्कुराकर उसे आशीर्वाद दिया और मुनिराज का हाथ अपने हाथों में थाम कर आगे बढ़ने लगे|

       तब मुनिराज बोले नमोस्तु गुरुदेव! वह युवक शराब पीये हुए था। ऐसा कहते हुए मुनिराज के स्वरों में किंचित संक्लेशता झलक रही थी, तब फौरन गुरूदेव बोले " नहीं मुनि श्री! हमको ऐसा नहीं बोलना चाहिए क्योंकि हम साधु हैं समता हमारा धर्म है| वो शराब पिये हुआ था और उसका असर उस पर स्पष्ट दिखाई दे रहा था। हम भी तो धर्म का अमृत रोज पीते हैं क्या उसका असर हम पर दिखाई नहीं देना चाहिये? अगर शराबी पर शराब का असर दिखाई देता है तो धर्मात्मा पर भी धर्म अमृत का असर अवश्य ही नजर आना चाहिये।"

ऐसे महान आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज, जो शिष्यों को कभी स्वभाव से च्युत नहीं होने देते। मुनिराज समझ गये और लौट गये पुनः अपने गुरुदेव की उंगली थाम कर अपने समता स्वभाव की ओर।


Jinagam panth prabhavna samiti