विषय विरक्ति का मार्ग

विषय विरक्ति का मार्ग

विषय विरक्ति का मार्ग

Posted On: 05-August-2022

सच्चे निर्ग्रंथ योगी के पास विषय पोषण का नहीं विषय विरक्ति का उपदेश हुआ करता है। 
एक बार पूज्य गुरुदेव के पास एक नाम का वैरागी आया और बड़ी विनम्रता के साथ निवेदन करने लगा, बोला- "भगवन् मैं भी आपके कर कमलों से दीक्षा गृहण करके आत्मा का कल्याण करना चाहता हूँ।"
गुरुदेव ने प्रसन्न मन से दिया आशीर्वाद और साथ ही दी एक हिदायत, क्योंकि गुरुदेव उसके हावभाव से समझ चुके थे कि इसका वैराग्य भी वास्तविक नहीं है। अतः गुरुदेव ने कहा- "भैया दीक्षा लेने के लिए सभी प्रकार के भौतिक साधनों का त्याग करना पड़ता है।"
वो थोड़ा सोच में पड़ गया फिर अपने को सम्हालते हुये बोला - "जी गुरुदेव मैं तैयार हूँ, लेकिन गुरुदेव एक निवेदन है क्या मैं दीक्षा लेने के बाद भजन आदि सुनने के लिए साथ में मोबाइल आदि रख सकता हूँ।"
गुरुदेव उसकी बात सुनकर मुस्कुराने लगे और बोले एक काम करो- "तुम पहले घर पर रहकर भजन सुनलो ,क्योंकि यह तो उस विषयों के त्याग का मार्ग है। विषय विरक्ति के साथ ही इस मार्ग की शुरुआत होती है।"
शायद अब वो समझ चुका था ये सच्चे भावलिंगी विषय विरक्त योगी हैं अपनी दाल यहाँ गलने वाली नहीं है।


Jinagam panth prabhavna samiti