भूखे भजन न होए गोपाला

भूखे भजन न होए गोपाला

भूखे भजन न होए गोपाला

Posted On: 05-August-2022

प्रसंग विजयनगर (राजस्थान) का है:-

वहां के कार्यकर्ताओं ने 18 नवंबर को दोहरा कार्यक्रम रक्खा था।पहला पिच्छिका- परिवर्तन , दूसरा आध्यात्मिक कवि सम्मेलन।

आयोजन से पूर्व किसी ने सोचा भी नहीं था कि आज गुरुदेव का आहारों के समय अन्तराय हो जाएगा।परन्तु उस दिन गुरुदेव ने एक ग्रास भी नहीं लिया।लोग चिंतित हो उठे की दो कार्यक्रमों में गुरुदेव 4-5 घंटे का समय कैसे देंगे। परन्तु परम प्रतापी गुरुदेव ने मुस्कुराते हए दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे के मध्य दोनों कार्यक्रमों को सानिध्य दिया।

जब गुरुदेव वस्तिका से लौटे तो एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने पूछ लिया - हमने तो सुना था ' भूखे भजन न होए गोपाला ' मगर आपने तो कहावत को भी निष्फल कर दिया।

गुरुदेव ने उन्हें संतुष्ट करने के लिए उत्तर दिया- " ऐसे उत्सव भी कर्म-निर्जरा के अवसर प्रदान करते है "

यह सुनकर कमरे ने उपस्थित सभी भक्त धन्य धन्य हो उठे।


Jinagam panth prabhavna samiti